हिमाचल में मौसम का यू-टर्न: प्री-मानसून में सबसे ‘गीला’ जिला बना बिलासपुर, सामान्य से 72% अधिक बरसे बदरा
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; 6 जून तक भारी आंधी-तूफान और बिजली चमकने का 'येलो अलर्ट' जारी।

03/06/2026-VIDYA SAGAR
बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश में इस साल प्री-मानसून सीज़न ने मौसम के सारे पुराने समीकरण बदल दिए हैं। तपती गर्मी के बीच राज्य के कई हिस्सों में हुई झमाझम बारिश ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं आंकड़ों के लिहाज से एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (IMD Shimla) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल प्री-मानसून सीज़न (मार्च से मई) के दौरान बिलासपुर जिला पूरे हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक बारिश वाला जिला बनकर उभरा है।
आमतौर पर शुष्क रहने वाले इस इलाके में इस बार बादलों ने ऐसी मेहरबानी दिखाई कि बारिश के पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए।
आंकड़ों की जुबानी: बिलासपुर में टूटा रिकॉर्ड
मौसम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बिलासपुर में इस बार सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई है:
| विवरण | दर्ज आंकड़े |
| सामान्य औसत बारिश | 117.9 \text{ mm}$ |
| इस सीज़न में हुई वास्तविक बारिश | 203.4 \text{ mm}$ |
| बढ़ोतरी (प्रतिशत में) | सामान्य से 72% अधिक |
इस भारी बारिश के चलते जिले के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और जल स्रोतों का जलस्तर भी सुधरा है।
सावधान! अगले कुछ दिन भारी: मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिकों ने सचेत किया है कि राहत की यह बौछारें अभी थमने वाली नहीं हैं। विभाग ने आगामी दिनों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है:-
“राज्य में 8 जून तक बारिश का दौर लगातार जारी रहने का अनुमान है। विशेष रूप से 3 से 6 जून के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी आंधी-तूफान, तेज हवाएं चलने और आसमानी बिजली चमकने की आशंका है, जिसके लिए ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) जारी किया गया है।”
प्रशासन ने जारी की एडवायजरी
बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में ‘येलो अलर्ट’ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी कमर कस ली है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को हिदायत दी गई है कि:
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खराब मौसम के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और असुरक्षित ढांचों के नीचे शरण न लें।
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आंधी-तूफान के समय यात्रा करने से बचें, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) और दृश्यता (Visibility) कम होने का खतरा रहता है।
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किसान अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें।



