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हिमाचल में सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव; जॉइनिंग से पहले अब ‘डोप टेस्ट’ अनिवार्य, सीएम सुक्खू ने जारी किए सख्त निर्देश

नशामुक्त हिमाचल की ओर सुक्खू सरकार का ऐतिहासिक कदम; सिर्फ लिखित परीक्षा पास करना काफी नहीं, नशेड़ियों को नहीं मिलेगी सरकारी सेवा में जगह।

26/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला / हिमाचल न्यूज डेली: हिमाचल प्रदेश में युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने और सरकारी तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी व नशामुक्त बनाने के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और अभूतपूर्व फैसला लिया है। प्रदेश में अब किसी भी सरकारी विभाग में नौकरी पाने के लिए अभ्यर्थियों को एक कड़े दौर से गुजरना होगा। राज्य सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि अब हर सरकारी नौकरी के लिए ‘डोप टेस्ट’ (Dope Test) अनिवार्य होगा।

इसका सीधा मतलब यह है कि परीक्षा पास करने के बाद विभाग में पदभार ग्रहण करने (जॉइनिंग) से पहले उम्मीदवार का मेडिकल टेस्ट होगा, जिससे यह साफ हो सके कि कैंडिडेट किसी भी प्रकार के नशे (जैसे चिट्टा, हेरोइन, या अन्य प्रतिबंधित ड्रग्स) का आदी तो नहीं है।


प्रशासनिक सचिवों की बैठक में सीएम सुक्खू का कड़ा रुख

शुक्रवार देर शाम शिमला में प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि युवाओं को नशे, विशेषकर ‘चिट्टे’ के जानलेवा जाल से बचाना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

सीएम सुक्खू ने सभी सरकारी विभागों को तुरंत आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है ताकि आगामी सभी भर्तियों में जॉइनिंग से पहले डोप टेस्टिंग की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा सके।


नशे में संलिप्त कर्मचारियों पर गिरी गाज, कई हुए बर्खास्त

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की, जो चिट्टे (हेरोइन) या अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी या इस्तेमाल में संलिप्त पाए गए थे। सरकार इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति पर काम कर रही है।

हाल ही में राज्य सरकार ने नशे से जुड़े मामलों में संलिप्त पाए गए दर्जनों कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है, जिसमें पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों के कई दागी कर्मचारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त (Dismiss) तक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि नशे के काले कारोबार में शामिल किसी भी ड्रग माफिया या दागी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।


चतुर्थ श्रेणी पेंशनरों और युवाओं के लिए अन्य बड़े फैसले

इस महत्वपूर्ण बैठक में डोप टेस्ट के अलावा मुख्यमंत्री ने जनहित और कर्मचारी कल्याण से जुड़े कई अन्य अहम फैसले भी लिए:

  • चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) पेंशनरों को राहत: मुख्यमंत्री ने अपने बजट वादे को पूरा करते हुए सभी विभागों को निर्देश दिए कि चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट (अवकाश नकदीकरण) के भुगतानों को जल्द से जल्द क्लीयर किया जाए।

  • करुणामूलक नौकरियां: करुणामूलक आधार पर नौकरी का इंतजार कर रहे आवेदकों के लंबित मामलों की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि सरकार इन पर त्वरित और सहानुभूतिपूर्ण निर्णय ले सके।

  • JOA (IT) के 500 पद: युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हुए सरकार ने विभिन्न विभागों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट यानी JOA (IT) के 500 रिक्त पदों को जल्द भरने का निर्णय लिया है।


 

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