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हिमाचल सरकार का बड़ा लक्ष्य: ‘मिशन-32%’ के तहत साल 2030 तक बढ़ाया जाएगा राज्य का हरित आवरण

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी पहल; वित्तीय वर्ष 2026-27 में 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा भारी पौधारोपण।

21/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला: हिमाचल प्रदेश को देश का अग्रणी हरित राज्य बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में ‘मिशन-32 प्रतिशत’ की शुरुआत की गई है। इस दूरदर्शी मिशन का मुख्य उद्देश्य राज्य के वर्तमान हरित आवरण (फॉरेस्ट कवर) को 29.5 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 32 प्रतिशत करना है।


इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वन विभाग ने राज्य की पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी कार्य योजना तैयार की है। सरकार की इस नीति से न केवल पर्यावरण का संतुलन सुधरेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए साधन भी पैदा होंगे।


जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश का वन क्षेत्र 29.5 प्रतिशत है। वन क्षेत्र में इस योजनाबद्ध विस्तार से कई पर्यावरणीय फायदे होंगे:

  • जैव विविधता का संरक्षण: स्थानीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को सुरक्षित आवास मिलेगा।

  • प्राकृतिक संसाधनों का बचाव: मिट्टी के कटाव को रोकने और जल संरक्षण में भारी मदद मिलेगी।

  • जलवायु परिवर्तन का मुकाबला: बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकेगा।


इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कैम्पा (CAMPA), बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं और अन्य विभागीय योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। अकेले वित्तीय वर्ष 2026-27 में 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में पारिस्थितिकीय संतुलन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए फलदार एवं स्थानीय (देशी) किस्मों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।


राजीव गांधी वन संवर्धन योजना: महिलाओं और युवाओं की बढ़ेगी भागीदारी

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद से ही कई अभिनव हरित योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना और राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन स्कीम प्रमुख हैं।

सामुदायिक भागीदारी का अनूठा मॉडल:-

राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत वर्ष 2026-27 में लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए 1,100 सामुदायिक समूहों को जोड़ा जा रहा है, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है:-

  • 60 प्रतिशत महिला स्वयं सहायता समूह

  • 20 प्रतिशत युवा समूह

  • 20 प्रतिशत अन्य स्थानीय स्वयं सहायता समूह


हरित विकास रणनीति के मुख्य स्तंभ

योजना/रणनीति मुख्य लक्ष्य एवं प्रभाव
मिशन-32 प्रतिशत वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 29.5% से बढ़ाकर 32% करना।
वार्षिक पौधारोपण (2026-27) 8,000 हेक्टेयर भूमि पर स्थानीय और फलदार पौधों का रोपण।
महिला सशक्तीकरण वन संवर्धन अभियानों में 60% महिला समूहों को कमान।
सतत विकास स्तंभ नवीकरणीय ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस मिशन पर अपने विचार साझा करते हुए कहा:-

“हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हम हिमाचल प्रदेश को देश में पारिस्थितिकी संरक्षण और सतत विकास का एक रोल मॉडल बनाना चाहते हैं। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा, प्राकृतिक खेती, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और सतत पर्वतीय विकास को हमारी हरित रणनीति का मुख्य स्तंभ बनाया गया है। इन सामूहिक प्रयासों से हिमाचल एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ेगा।”


सरकार के इन नीतिगत प्रयासों और जन-भागीदारी के अनूठे संगम से यह उम्मीद जताई जा रही है कि हिमाचल प्रदेश आने वाले समय में देश के सबसे स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल राज्यों की सूची में शीर्ष पर स्थापित होगा।


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