कर्मचारी हितों पर प्रहार का आरोप: महंगाई भत्ते और एरियर भुगतान को लेकर उठे सवाल
प्रदेश कर्मचारियों ने केंद्र और राज्य के डीए अंतर तथा लंबित वेतन आयोग एरियर पर जताई चिंता

शिमला | विशेष रिपोर्ट | 21/04/2026 |
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों के आर्थिक हितों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में अंतर और लंबित वेतन आयोग एरियर के भुगतान को प्रमुख मुद्दा बताया है।
कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि जहां केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लगभग 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को अभी भी 45 प्रतिशत डीए पर संतोष करना पड़ रहा है। इस अंतर को कर्मचारियों के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान बताया जा रहा है।
हर महीने आर्थिक नुकसान का दावा
कर्मचारी नेताओं के अनुसार, डीए में 15 प्रतिशत के अंतर का सीधा असर कर्मचारियों की आय पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि इससे प्रदेश के प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 12,000 रुपये से अधिक मासिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
इसके साथ ही, वेतन आयोग से संबंधित लंबित एरियर भुगतान भी कर्मचारियों के बीच असंतोष का बड़ा कारण बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि औसतन 15 लाख रुपये से अधिक का एरियर अब तक जारी नहीं किया गया है, जिसे वे अपना वैधानिक अधिकार बता रहे हैं।
नेतृत्व की भूमिका पर उठे प्रश्न
कर्मचारी वर्ग के कुछ प्रतिनिधियों ने स्वयं को आर्थिक विशेषज्ञ बताने वाले नेताओं और कर्मचारी संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित आवाज़ नहीं उठाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कर्मचारियों को मजबूत प्रतिनिधित्व और स्पष्ट नीति संवाद की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक सुरक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाला जा सके।
सरकार से समाधान की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि डीए विसंगति को जल्द दूर किया जाए और लंबित एरियर भुगतान पर स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए। उनका कहना है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता राज्य प्रशासन की कार्यक्षमता से भी सीधे जुड़ी हुई है।
इस बीच, राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चा का विषय बनने की संभावना जताई जा रही है!




