श्रद्धांजलि: ‘पोचिशे बोइशाख’ पर PM मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को किया नमन, साझा किया प्रेरक संदेश
"गुरुदेव के विचार आज भी प्रासंगिक" — प्रधानमंत्री

नई दिल्ली | 09 मई, 2026 आज देश भर में विश्वविख्यात कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई जा रही है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बंगाली कैलेंडर के अनुसार, इस दिन को ‘पोचिशे बोइशाख’ (Pochishe Boishakh) के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
“गुरुदेव के विचार आज भी प्रासंगिक” — प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया और अपने संदेश के माध्यम से गुरुदेव टैगोर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के कालातीत विचार, कला और साहित्य के प्रति उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में टैगोर जी की भूमिका अतुलनीय रही है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विश्व बंधुत्व का संदेश
गुरुदेव टैगोर केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् भी थे। लेख में उनके द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन और उनके ‘विश्व-भारती’ के विजन को याद किया गया, जो आज भी एकता और मानवता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से गुरुदेव के ‘एकला चलो रे’ और साहस के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
क्यों खास है ‘पोचिशे बोइशाख’?
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बंगाली संस्कृति का आधार: यह दिन बंगाल और पूरी दुनिया में फैले बंगाली समुदाय के लिए सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है।
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साहित्यिक विरासत: आज के दिन गुरुदेव की कालजयी कृतियों जैसे ‘गीतांजलि’ और उनके द्वारा रचित ‘रवींद्र संगीत’ का गायन कर उन्हें याद किया जाता है।
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दो देशों का राष्ट्रगान: वह दुनिया के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों—भारत (जन गण मन) और बांग्लादेश (आमार सोनार बांग्ला)—ने अपने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
टैगोर जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कवि सम्मेलनों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली और कोलकाता में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जहाँ गुरुदेव के मानवतावादी दर्शन पर चर्चा हुई।



