बंगलुरू: सीएम सुक्खू ने श्री श्री रविशंकर से लिया आशीर्वाद, हिमाचल में प्राकृतिक खेती और गौ-संरक्षण पर हुई महाचर्चा
बजट 2026-27 के प्रावधानों और 'गोपाल योजना' पर हुई बात; आध्यात्मिक गुरु ने की हिमाचल सरकार के प्रयासों की सराहना।

21/05/2026-VIDYA SAGAR
बंगलुरू (विशेष ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बंगलुरू में आध्यात्मिक गुरु एवं ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से शिष्टाचार भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के दौरान दोनों विभूतियों के बीच हिमाचल प्रदेश के विकास, विशेषकर पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक खेती और बेसहारा गौवंश के संरक्षण को लेकर बेहद विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान आश्रम का दौरा भी किया, जहाँ उन्होंने परिसर में सेवा कर रहे हिमाचल प्रदेश के मूल निवासियों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आश्रम की गौशाला में जाकर स्वयं गौ-सेवा भी की।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और MSP की गारंटी
श्री श्री रविशंकर के साथ चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है। सरकार ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्राकृतिक खेती से पैदा होने वाली फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देने की व्यवस्था की है।

“प्राकृतिक खेती को एमएसपी से जोड़ने के कारण उपभोक्ताओं को बाजार में आसानी से रसायनमुक्त और शुद्ध उत्पाद मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे किसानों को भी उनकी मेहनत का बेहतरीन और सही दाम मिल रहा है।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री (हिमाचल प्रदेश)

गौवंश के संरक्षण के लिए ‘गोपाल योजना’ में बड़ा बदलाव
बेसहारा गौवंश की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘गोपाल योजना’ के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत निजी गौ-सदनों में आश्रित गौवंश के लिए दी जाने वाली मासिक अनुदान राशि को 700 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1200 रुपये प्रति गौवंश कर दिया गया है।
इसके साथ ही, बजट 2026-27 में बेसहारा गौवंश के पुनर्वास के लिए कई नए और कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। राज्य में हाल के वर्षों में कई बड़े गौ-अभ्यारण्यों और आधुनिक गौ-सदनों का निर्माण किया गया है। सरकार ने अब एक नई नीति अपनाई है जिसके तहत प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs), सामाजिक संगठनों और इच्छुक कॉरपोरेट या उद्योग समूहों को सरकारी गौ-सदनों तथा गौ-अभ्यारण्यों को गोद लेने की अनुमति दी जाएगी, ताकि उनका प्रबंधन और बेहतर हो सके।
श्री श्री रविशंकर ने थपथपाई पीठ
मुख्यमंत्री के साथ इस गंभीर चर्चा के बाद आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने हिमाचल प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से धरती की सेहत सुधारना और बेसहारा गौवंश को आश्रय देना बेहद पुण्य और दूरदर्शी कार्य है। उन्होंने पर्यावरण और जीव संरक्षण के क्षेत्र में हिमाचल सरकार द्वारा उठाए जा रहे इन कदमों को देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बताया।



