‘सुखी परिवार योजना’ के नाम पर प्रदेश को ठगने की तैयारी में मुख्यमंत्री, बिना बजट की योजनाएं सिर्फ ‘चाइनीज खिलौना’: जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष का सुक्खू सरकार पर तीखा हमला; समाज कल्याण बजट में 63% की ऐतिहासिक कटौती का लगाया आरोप, हिमकेयर और सहारा जैसी जनहित योजनाओं को रोकने का दावा।

VIDYA SAGAR
शिमला, 10 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की सुक्खू सरकार की नई ‘सुखी परिवार योजना’ को लेकर तीखा हमला बोला है। शिमला से जारी एक आधिकारिक बयान में जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बिना बजट प्रावधान के हवा-हवाई घोषणाएं कर प्रदेश की जनता को बरगला रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की योजनाओं की तुलना ‘चाइनीज खिलौनों’ से करते हुए कहा कि इनकी सरकार की योजनाएं या तो शुरू ही नहीं होतीं, या शुरू होते ही बंद हो जाती हैं।
समाज कल्याण बजट में 63 फीसदी की ऐतिहासिक कटौती: नेता प्रतिपक्ष
पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ नई योजनाओं को लॉन्च करने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से समय मांगा जा रहा है, तो दूसरी तरफ समाज के जरूरतमंद वर्गों का बजट काटा जा रहा है:
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बजट में भारी कटौती: जयराम ठाकुर ने दावा किया कि सुक्खू सरकार ने इस साल एससी (SC), एसटी (ST), ओबीसी (OBC), माइनॉरिटी और समाज कल्याण विभाग के बजट में पिछले साल के मुकाबले 63 प्रतिशत की ऐतिहासिक कटौती की है।
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आंकड़ों का गणित: पिछले साल समाज कल्याण से जुड़े विषयों के लिए ₹1618 करोड़ का प्रावधान था, जिसे इस साल घटाकर मात्र ₹604 करोड़ कर दिया गया है।
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पेंशन पर संकट: नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब पिछले साल पूरे बजट के बावजूद लोगों को वृद्धावस्था पेंशन के लिए तरसना पड़ा, तो इस बार इतनी बड़ी कटौती के बाद बुजुर्गों को पेंशन कैसे मिलेगी?

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“सुख की सरकार” बनी “शुल्क की सरकार”
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि झूठी गारंटियां देकर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार लगातार जनहित की पुरानी योजनाओं को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय शुरू की गई हिमकेयर, सहारा, शगुन और स्वावलंबन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का बजट रोककर उन्हें अप्रासंगिक बनाने का प्रयास किया गया। इसके बाद प्रदेश की जनता पर तरह-तरह के अतिरिक्त शुल्क लाद दिए गए, जिससे यह ‘सुख की सरकार’ के बजाय ‘शुल्क की सरकार’ बनकर रह गई है।
“सुक्खू सरकार धरातल पर काम करने के बजाय सिर्फ विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। विधानसभा के आंकड़े गवाह हैं कि सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजनाओं पर कुल ₹50 करोड़ भी खर्च नहीं किए, जबकि उनके प्रचार-प्रसार पर इससे कहीं अधिक राशि फूंक दी गई।”
— जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
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कांग्रेस आलाकमान से पूछे तीखे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा दी गई 10 गारंटियों को याद दिलाते हुए केंद्रीय नेतृत्व को भी घेरा। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस के बड़े नेता अब प्रदेश की जनता को जवाब दें कि:
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युवाओं को मिलने वाले 5 लाख रोजगार और स्टार्टअप फंड कहाँ हैं?
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महिलाओं को दी जाने वाली ₹1500 सम्मान निधि का क्या हुआ?
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हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, ₹100 प्रति लीटर दूध और गोबर खरीद जैसे वादे धरातल पर क्यों नहीं उतरे?
जयराम ठाकुर ने अंत में मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे आंकड़ों की हेरफेर और विज्ञापनों की राजनीति छोड़, हिमाचल प्रदेश की जनता के हित में वास्तविक और ईमानदार कार्य करें।



