जनता के द्वार ‘सुख की सरकार’: शिमला में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सुनीं जन-समस्याएं, त्वरित समाधान के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने आम जनता, प्रतिनिधिमंडलों और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों से सीधा संवाद कर जानी उनकी अपेक्षाएं; अधिकारियों को फाइलें अटकाने के बजाय तत्काल राहत देने के कड़े आदेश।

VIDYA SAGAR
शिमला, 10 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज राजधानी शिमला में एक विशेष जन-सुनवाई कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों की समस्याओं, शिकायतों तथा सुझावों को सुना। जनता से सीधे संवाद की अपनी अनूठी कार्यशैली को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने एक-एक कर लोगों से मुलाकात की और मौके पर ही कई गंभीर मामलों का निपटारा करने के निर्देश जारी किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज ही सर्वोपरि है और जब किसी आम नागरिक की समस्या का समय पर समाधान होता है, तो पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति आम जनमानस का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

आम जनता की सहूलियत प्राथमिकता: मुख्य बिंदु
जन-सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रशासनिक अधिकारियों को जवाबदेही और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:
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त्वरित एवं प्रभावी समाधान: मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन-समस्याओं के निवारण में किसी भी प्रकार की लालफीताशाही (Red-tapism) या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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ग्रामीणों को जिला मुख्यालयों के चक्कर से मिलेगी मुक्ति: सरकार की प्राथमिकताओं को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘ग्रामीणों के द्वार’ जाकर नीतियां बना रही है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए शिमला या जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
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जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा: जन-सुनवाई में कई लाभार्थियों ने विभिन्न राज्य कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव दिए, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फील्ड रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए।
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प्रतिनिधिमंडलों ने रखे अपनी मांगों के प्रस्ताव
शिमला में आयोजित इस मुलाकात के दौरान न केवल आम नागरिकों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याएं रखीं, बल्कि कई सामाजिक, शैक्षणिक और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी पक्षों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य के सीमित संसाधनों के बावजूद जनहित और राज्य के समग्र विकास से जुड़े हर जायज मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
“हमारा ध्येय केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि आम जनता को धरातल पर उसका लाभ पहुंचाना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे जन-शिकायतों को फाइलों में दबाने के बजाय संवेदनशीलता के साथ उनका समयबद्ध निवारण सुनिश्चित करें।”
— ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश

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व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में एक और कदम
मुख्यमंत्री की इस सीधी जन-सुनवाई को सचिवालय और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मौके पर उपस्थित उच्चाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न विभागों से जुड़ी जन-शिकायतों का एक केंद्रीकृत डेटा (Centralized Data) तैयार करें, ताकि भविष्य में शिकायतों की पेंडेंसी और उनके समाधान की दर पर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से निगरानी रखी जा सके।



