जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के सच्चे शिल्पकार थे पंडित प्रेमनाथ डोगरा: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता
कच्ची छावनी स्थित प्रेमनाथ डोगरा भवन पहुंचे राज्यपाल; परिजनों से मुलाकात कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि, पैतृक गांव समीलपुर में लगेगी भव्य प्रतिमा।

VIDYA SAGAR
जम्मू, [19/05/2026]: जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पंडित प्रेमनाथ डोगरा का योगदान अमूल्य है। वे स्वतंत्रता के बाद के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और कद्दावर राष्ट्रवादी नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण और बिना शर्त विलय के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। यह उद्गार राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज जम्मू के पुराने शहर के कच्ची छावनी क्षेत्र स्थित ‘प्रेमनाथ डोगरा भवन’ में व्यक्त किए।
राज्यपाल आज पंडित प्रेमनाथ डोगरा के परिजनों से भेंट करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने इस महान सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
‘शेर-ए-दुग्गर’ का साहसी नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति
परिजनों से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि पंडित प्रेमनाथ डोगरा जी ने अपने साहसी नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर जन-जन के दिल में जगह बनाई। यही कारण है कि उन्हें ‘शेर-ए-दुग्गर’ के रूप में पहचान मिली। उनके विचार, सिद्धांत और राष्ट्र के लिए दिया गया त्याग आज भी देश भर के लाखों राष्ट्रवादी और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता है।
‘एक निशान, एक विधान, एक प्रधान’ आंदोलन को किया याद
प्रजा परिषद के अध्यक्ष के रूप में पंडित डोगरा के ऐतिहासिक कार्यों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा:-
“उनके नेतृत्व में चले ‘एक निशान, एक विधान, एक प्रधान’ आंदोलन की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर किए गए उनके निरंतर संघर्ष और अदम्य संकल्प ने ही अंततः जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ संवैधानिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी और कुर्बानियों ने उन्हें स्वतंत्र भारत के अग्रणी नेताओं की श्रेणी में स्थापित कर दिया।”
राजनीति से परे: डोगरा संस्कृति और समाज कल्याण
राज्यपाल ने कहा कि पंडित डोगरा केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि एक सच्चे समाज सुधारक भी थे। राजनीति से परे उठकर उन्होंने हमेशा आम लोगों के कल्याण, डोगरी भाषा के उत्थान और डोगरा संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य किया। इसी सेवा भाव के कारण डोगरा समाज में उनका स्थान सर्वोच्च और अत्यंत आदरणीय है।
पैतृक गांव समीलपुर में स्थापित होगी भव्य प्रतिमा
इस भावुक और ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला सांबा के समीलपुर गांव (जो कि पंडित प्रेमनाथ डोगरा का पैतृक गांव है) में उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। राज्यपाल ने कहा कि इस महान सपूत को उनकी अपनी जन्मभूमि पर दी जाने वाली यह एक सच्ची और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि होगी।



