इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्धविराम: लेबनान में थमेगी जंग! ट्रंप के दखल के बाद नेतन्याहू सेना हटाने को तैयार
अमेरिकी सीजफायर प्रस्ताव पर हिज्बुल्लाह की मुहर; मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद

VIDYA SAGAR
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क, नई दिल्ली/बेरुत 2 जून 2026
मुख्य बिंदु:
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम की उम्मीदें बेहद मजबूत।
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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाने पर हुए सहमत।
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हिज्बुल्लाह ने अमेरिकी सीजफायर प्रस्ताव को दी अपनी आधिकारिक मंजूरी।
बेरुत/तेल अवीव: पिछले कई महीनों से मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण रक्तपात और तनाव के बीच आज एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजरायल और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से चल रहा युद्ध अब थमता नजर आ रहा है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर सहमति लगभग बन चुकी है।
डोनाल्ड ट्रंप के दखल से पलटी बाजी
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दखल सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप की सीधी मध्यस्थता और कड़े रुख के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेबनान की सीमा से अपनी सेना (IDF) को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। इजरायली कैबिनेट में भी इस पर गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है।
हिज्बुल्लाह ने माना अमेरिकी प्रस्ताव
दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह ने भी इस अमेरिकी सीजफायर प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। लेबनानी सूत्रों का कहना है कि हिज्बुल्लाह अब सीमाई इलाकों से पीछे हटने और हथियारों को शांत करने के लिए तैयार है, बशर्ते इजरायल लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करे और अपनी सेना को पूरी तरह वापस बुलाए।
क्या हैं सीजफायर की शर्तें?
सूत्रों के अनुसार, इस शांति समझौते के तहत:
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सेना की वापसी: इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से दक्षिणी लेबनान खाली करेगी।
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सुरक्षित बफर जोन: लेबनानी सेना और संयुक्त राष्ट्र (UN) की शांति सेना इस क्षेत्र का नियंत्रण संभालेगी ताकि हिज्बुल्लाह दोबारा इजरायल पर सीधा हमला न कर सके।
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विस्थापितों की घर वापसी: युद्ध के कारण विस्थापित हुए दोनों देशों के लाखों नागरिकों को सुरक्षित उनके घरों को लौटने की अनुमति होगी।
दुनिया ने ली राहत की सांस
इस युद्धविराम की खबर आते ही वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जमीन पर इस समझौते को पूरी तरह लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसे मध्य पूर्व में शांति बहाली की दिशा में अब तक का सबसे ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



