बस्तर का रण: गृह मंत्री अमित शाह का दो दिवसीय दौरा आज से; नक्सलवाद के खिलाफ बड़े ‘फाइनल प्रहार’ की तैयारी!
सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों के साथ करेंगे हाई-लेवल समीक्षा बैठक; अंदरूनी इलाकों में विकास और सुरक्षा ग्रिड का लेंगे जायजा

18/05/2026-VIDYA SAGAR
जगदलपुर/नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर आज देश की सबसे बड़ी हलचल छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से बस्तर के दो दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण दौरे पर पहुंच रहे हैं। केंद्र में लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की कमान संभाल रहे अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब सुरक्षा बल लाल आतंक के खिलाफ अपने सबसे आक्रामक चरण में हैं।
इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान गृह मंत्री न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे, बल्कि बस्तर के उन अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों का भी रुख कर सकते हैं जो कभी नक्सलियों के अभेद्य किले माने जाते थे।
एंटी-नक्सल ऑपरेशंस की होगी ‘सुपर समीक्षा’
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जगदलपुर पहुंचते ही गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), बीएसएफ और कोबरा कमांडो के शीर्ष कमांडरों के साथ एक हाई-लेवल सिक्योरिटी मीटिंग (High-Level Security Meeting) की अध्यक्षता करेंगे।
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रणनीति पर मंथन: इस बैठक में पिछले कुछ महीनों में बस्तर, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में ढेर किए गए नक्सलियों और सुरक्षा बलों की सफलताओं का ब्यौरा लिया जाएगा।
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अगला रोडमैप: मानसून से ठीक पहले नक्सलियों की गतिविधियों को पूरी तरह ठप करने और सीमावर्ती राज्यों (ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना) के साथ ज्वाइंट ऑपरेशंस को तेज करने का अंतिम ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।
‘सुरक्षा के साथ विकास’ मॉडल का लेंगे जायजा
केंद्रीय गृह मंत्री का यह दौरा सिर्फ सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं है। अमित शाह बस्तर के दूरदराज के क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की भी जमीनी समीक्षा करेंगे।
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अंदरूनी इलाकों में कनेक्टिविटी: नक्सलियों के प्रभाव को कम करने के लिए अंदरूनी गांवों में बनाई जा रही सड़कों, नए खुले फॉरवर्ड कैंपों (Forward Camps), मोबाइल टावरों और बैंकों की प्रगति की जांच की जाएगी।
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जवानों से सीधा संवाद: गृह मंत्री बस्तर के किसी अंदरूनी कैंप में जाकर मोर्चे पर तैनात जवानों से मुलाकात कर सकते हैं और उनका हौसला बढ़ा सकते हैं, जिससे सुरक्षा बलों के मनोबल में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
गृह मंत्रालय का संकल्प: “केंद्र सरकार का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक देश से वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) को पूरी तरह जड़ से उखाड़ फेंकना है। बस्तर का यह दौरा इसी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है, जहां विकास और सुरक्षा को एक साथ अंतिम छोर तक पहुंचाया जा रहा है।”
इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए पूरे बस्तर संभाग में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर ड्रोन और आधुनिक सर्विलांस कैमरों से नजर रखी जा रही है, और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।



