तेल की कीमतों में लगी आग: चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल ₹3 और CNG ₹2 महंगा, सड़क से सोशल मीडिया तक विपक्ष का करारा हमला
सड़क से संसद तक विपक्ष का वार: प्रमुख नेताओं के बड़े बयान

17/05/2026-VIDYA SAGAR
नई दिल्ली: देश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लगा है। राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर और CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि के बाद पूरे देश में सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत तमाम विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सड़क से संसद तक विपक्ष का वार: प्रमुख नेताओं के बड़े बयान
1. राहुल गांधी: “गलती मोदी सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी” लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा कि “गलती मोदी सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी।” राहुल गांधी ने चेताया कि ₹3 का यह झटका तो सिर्फ एक शुरुआत है, चुनाव खत्म होने के बाद अब बाकी की ‘वसूली’ जनता से किस्तों में की जाएगी।
2. अखिलेश यादव का तंज: “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है” समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को घेरने के लिए सोशल मीडिया पर एक कार्टून साझा किया। उन्होंने आम जनता को इस कमरतोड़ महंगाई से बचने का अनोखा सुझाव देते हुए लिखा, “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, जनता की जेब पर डाका डालना और उन पर आर्थिक बोझ थोपना इस सरकार की स्थायी नीति बन चुकी है।
3. जयराम रमेश: वैश्विक तेल खेल का पर्दाफाश वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार की आर्थिक नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
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जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऐतिहासिक रूप से बेहद कम थीं, तब सरकार ने टैक्स बढ़ाकर मुनाफा कमाया और उसका फायदा कभी भारतीय उपभोक्ताओं को नहीं दिया।
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अब जब पश्चिम एशिया में तनाव (इरान संकट) के कारण वैश्विक कीमतें बढ़ी हैं, तो चुनाव खत्म होते ही सरकार ने तुरंत सारा बोझ आम आदमी पर डाल दिया है।
4. अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सांसदों ने भी घेरा
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रेवंत रेड्डी (मुख्यमंत्री, तेलंगाना): उन्होंने इस जनविरोधी फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। रेड्डी ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। इस बढ़ोतरी से मालभाड़ा बढ़ेगा, जिससे सीधे तौर पर सब्जी, राशन और रोजमर्रा की हर आवश्यक चीज महंगी हो जाएगी।
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डेरेक ओ’ब्रायन (TMC सांसद): तृणमूल कांग्रेस के नेता ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार की पुरानी क्रोनोलॉजी है—पहले जनता से हाथ जोड़कर वोट लो और चुनाव जीतते ही उन पर महंगाई का हंटर चलाओ।
देश भर में विरोध प्रदर्शन: सड़कों पर उतरी महिला कांग्रेस
ईंधन के दामों में हुई इस अचानक वृद्धि के विरोध में देश के कई हिस्सों में आक्रोश देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई बड़े शहरों में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘स्कूटी मार्च’ निकाला और बढ़े हुए दामों को तुरंत वापस लेने की मांग की।
सरकार और बीजेपी का पलटवार: ‘वैश्विक संकट के कारण मजबूरी का कदम’
विपक्ष के चौतरफा हमलों और देशव्यापी विरोध के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकारी प्रवक्ताओं ने इस फैसले का बचाव किया है। सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि:
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यह बढ़ोतरी घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जारी इरान संकट (Iran War) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों की वजह से मजबूरी में उठाई गई है।
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दुनिया भर में चल रहे ईंधन संकट और मंदी के बावजूद भारत सरकार ने पिछले चार सालों से देश में तेल की कीमतों को स्थिर और नियंत्रित रखा था।
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इस बार भी वैश्विक दबाव के बाद भी आम जनता को ध्यान में रखते हुए वृद्धि को बेहद सीमित (लगभग 3%) रखने की पूरी कोशिश की गई है।
बहरहाल, सरकार के इन तर्कों से विपक्ष और आम जनता संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में महंगाई का यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और गरमाने के आसार हैं।



