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केरल में राजनीतिक बदलाव: वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ; समारोह में शामिल होने तिरुवनंतपुरम पहुंचे राहुल और प्रियंका गांधी

यूडीएफ (UDF) की धमाकेदार वापसी, 10 साल का वामपंथी शासन खत्म

18/05/2026-VIDYA SAGAR

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद आज राज्य में एक नए युग की शुरुआत हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन (V.D. Satheesan) ने आज केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली है। इस भव्य और ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाडरा आज सुबह ही विशेष विमान से केरल के लिए रवाना हुए और कार्यक्रम में शामिल हुए।


यूडीएफ (UDF) की धमाकेदार वापसी, 10 साल का वामपंथी शासन खत्म

केरल में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इस जीत के साथ ही केरल में पिछले 10 साल से चले आ रहे वामपंथी (LDF) शासन का अंत हो गया है और राज्य की सत्ता एक बार फिर कांग्रेस गठबंधन के हाथों में आ गई है।


60 साल बाद इतिहास: पूरी कैबिनेट ने एक साथ ली शपथ

तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित इस समारोह में न केवल मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, बल्कि उनके साथ 20 अन्य मंत्रियों ने भी एक साथ शपथ ली। केरल के राजनीतिक इतिहास में करीब 60 साल बाद ऐसा देखने को मिला है जब पूरी कैबिनेट ने एक साथ पद की शपथ ग्रहण की हो। नए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का खास ख्याल रखा गया है, जिसमें कई नए चेहरों को भी मौका मिला है।

शपथ ग्रहण में उमड़ा दिग्गज नेताओं का हुजूम

इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह से केरल में मौजूद रहा। समारोह में शामिल होने के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाडरा के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विपक्ष शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रमुख राजनेता भी इस बदलाव के गवाह बने।


चुनौतियों से भरा होगा नया कार्यकाल

मुख्यमंत्री पद संभालते ही वीडी सतीशन के सामने राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का इस समारोह में शामिल होना यह दर्शाता है कि कांग्रेस आलाकमान के लिए दक्षिण भारत का यह राज्य राजनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है।


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